श्रेणी : videos | लेखक : The Hindu Today | दिनांक : 12 February 2026 13:22
योग गुरु पद्मश्री भारत भूषण: एक अद्वितीय जीवन यात्रा
सच्चे ज्ञान और स्वार्थ से रहित एक युग में केवल कुछ चुनिंदा धन्य आत्माएं जन्म लेती हैं, जो मानव को उदासीनता, भ्रम और निराशा से बाहर निकालने के लिए दिव्यता और अटूट दृढ़ संकल्प लिए होती हैं. ऐसी ही एक महान आत्मा हैं श्रद्धेय योग गुरु पद्मश्री भारत भूषण जी, जिन्होंने योग की ओजस्वी और परिवर्तनकारी शिक्षाओं का प्रसार 70 से अधिक देशों में किया.
वर्ष 1973 में सहारनपुर में उन्होंने मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योगाश्रम की स्थापना की, जो योग के प्रचार और प्रसार में एक शक्तिशाली उत्प्रेरक साबित हुआ. स्वामी भारत भूषण ने ऋषिकेश में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के संस्थापक और अध्यक्ष के रूप में भी योग को वैश्विक पहचान दिलाई.
स्वामी भारत भूषण जी ने अपने पूरे जीवन को योग के अभ्यास और पवित्र शिक्षाओं के लिए समर्पित किया. उनके प्रयासों ने न केवल शरीर और स्वास्थ्य को बल्कि बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास को भी एक साथ सशक्त किया.
बाल्यकाल और प्रारंभिक संस्कार
स्वामी भारत भूषण ने अपने बाल्यकाल में एक सौभाग्यशाली परिवार और आदर्श शिक्षक पिता से संस्कार प्राप्त किए. उनके भीतर जिज्ञासा का गुण बचपन से ही प्रबल था, जो आज भी जीवित है. बचपन में ही उन्होंने धार्मिक अनुष्ठान और खेलों के माध्यम से सीखना शुरू कर दिया.
उन्होंने हमेशा बड़े-बुजुर्गों के साथ समय बिताना पसंद किया, जिससे उन्हें अनुभव और जीवन के महत्वपूर्ण पाठ मिलते रहे. इस सीख ने उनके जीवन में योग और साधना की नींव रखी.
योग और बॉडी बिल्डिंग का संगम
युवावस्था में भारत भूषण जी ने शारीरिक विकास के लिए बॉडी बिल्डिंग में कदम रखा. उन्होंने महसूस किया कि केवल मांसपेशियां विकसित करने से व्यक्तित्व पूर्ण नहीं बनता. इसलिए उन्होंने योग और व्यायाम का समन्वय किया.
उनका मानना था कि शरीर मोक्ष के साधन के रूप में है, न कि केवल भोग के लिए. उन्होंने 10 साल लगातार बॉडी बिल्डिंग और योग में प्रशिक्षण लिया और विश्वविद्यालय से लेकर राष्ट्रीय चैंपियनशिप तक कई खिताब जीते. इस दौरान उनका फोकस हमेशा समग्र व्यक्तित्व और मानसिक, बौद्धिक विकास पर रहा.
मोक्षायतन योग संस्थान की स्थापना
1973 में स्वामी भारत भूषण ने मोक्षायतन योग संस्थान की स्थापना की. इसका उद्देश्य युवा वर्ग को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना था. संस्थान में व्यायामशाला, पाठशाला, गायशाला, योगशाला और यज्ञशाला जैसी सुविधाएं प्रदान की गईं.
यहां युवा न केवल शारीरिक फिटनेस बल्कि योग, ध्यान, संस्कृत और आध्यात्मिक शिक्षा भी सीखते हैं. यह संस्थान भारत की सत्य-संस्कार और सनातन संस्कृति के प्रचार का केंद्र बन गया.
वैश्विक योग मिशन
स्वामी भारत भूषण जी ने योग के प्रचार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिशन शुरू किया. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, चीन, जापान, ताइवान, सूरीनाम और मारिशस जैसे देशों में उन्होंने योग प्रशिक्षण और केंद्र स्थापित किए.
उनकी पहल ने विदेशों में योग को केवल व्यायाम नहीं बल्कि ध्यान, प्राणायाम और समग्र जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया. उन्होंने हमेशा भारतीय योग की मूलता और पवित्रता को बनाए रखा.
भारत योग: मौलिकता की रक्षा
स्वामी भारत भूषण जी का उद्देश्य केवल योग का प्रचार नहीं था, बल्कि भारत की मूल योग विद्या की रक्षा भी था. उन्होंने कभी अपने नाम से ब्रांडिंग नहीं की और सिखाया कि योग का मूल उद्देश्य समग्र स्वास्थ्य और मानसिक शांति है.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव और प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से योग को वैश्विक पहचान दिलाई. उनका संदेश स्पष्ट है: योग केवल कसरत नहीं, बल्कि जीवन की समग्र साधना है.
योग का वैश्विक प्रभाव
आज स्वामी भारत भूषण के नेतृत्व में मोक्षायतन योग संस्थान की शाखाएं विश्व के सात देशों में सक्रिय हैं. उनके प्रशिक्षित योग साधक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग का प्रचार कर रहे हैं. उनके प्रयासों ने योग को एक वैश्विक जीवनशैली और आध्यात्मिक विज्ञान के रूप में स्थापित किया है. स्वामी भारत भूषण जी की यह यात्रा न केवल योग की, बल्कि सत्य, संस्कृति और मानवता के विकास की भी प्रेरणा है.
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