समुद्र को पार करने के लिए राम ने तैरता हुआ पुल क्यों बनाया? एक्सपर्ट ने बताई ये वजह

श्रेणी : videos | लेखक : The Hindu Today | दिनांक : 12 February 2026 13:02

भगवान श्रीराम ने लंका तक पहुँचने के लिए समुद्र पार करने हेतु पारंपरिक लकड़ी और पत्थर के पुल के बजाय तते हुए पत्थरों का पुल बनाया. उस समय समुद्र की गहराई और नींव की जानकारी नहीं थी, इसलिए स्थिर पुल बनाना संभव नहीं था. इसके लिए आवश्यक संसाधन और समय भी उपलब्ध नहीं थे.

भगवान राम ने उस क्षेत्र में उपलब्ध विशेष प्रकार के पत्थरों का उपयोग किया. ये पत्थर आकार में बड़े थे, लेकिन उनका भार कम था. नन और नील नामक दो इंजीनियर, जो कि विश्वकर्मा के पुत्र थे, ने अपनी विद्वता का परिचय देते हुए इन पत्थरों को लकड़ियों के साथ जोड़कर एक मजबूत और लचीला पुल तैयार किया. उन्होंने लकड़ियों, टहनियों और शाखाओं का इस्तेमाल करके पत्थरों को आपस में इस तरह जोड़ा कि वे आपस में मजबूती से जुड़े रहे.

इस तकनीक के कारण पुल न केवल मजबूत बना, बल्कि समुद्र की धाराओं के अनुसार हिलने-डुलने में भी सक्षम था. पुल बहा नहीं, टूटा नहीं और पूरी तरह स्थिर रहने के साथ फ्लेक्सिबल भी था. इस अद्भुत निर्माण ने न केवल राम और उनकी सेना को लंका तक पहुँचने में मदद की, बल्कि रावण की सेना के लिए एक संदेश भी दिया कि श्रीराम का नेतृत्व और उनकी सेना अद्वितीय शक्ति और विद्वता से सम्पन्न है.

यह पुल केवल भौतिक दृष्टि से ही अद्भुत नहीं था, बल्कि इसमें वैदिक और पौराणिक ज्ञान का भी प्रतीकात्मक समावेश था. इसने सत्य-संस्कार और सनातन संस्कृति की महानता को भी प्रदर्शित किया.