धरती पर अमृत की वो चार बूंदें कहां-कहां गिरी जहां अब होता है महा कुंभ का आयोजन?

श्रेणी : videos | लेखक : The Hindu Today | दिनांक : 20 February 2026 12:05

महाकुंभ की पौराणिक कथा का संबंध समुद्र मंथन से माना जाता है. मान्यता है कि जब देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तब उससे अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए. इन रत्नों का बंटवारा दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से कर लिया.


लेकिन जब अमृत कलश निकला, तो उसे पाने के लिए देवताओं और असुरों के बीच भीषण संघर्ष छिड़ गया. अमरत्व देने वाले अमृत को लेकर दोनों पक्षों में तीव्र विवाद हुआ.


असुरों से अमृत की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने अमृत कलश अपने वाहन गरुड़ को सौंप दिया. जब असुरों को इसका पता चला, तो उन्होंने गरुड़ से अमृत छीनने का प्रयास किया.


इस दौरान हुई छीना-झपटी में अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक—पर गिर गईं. मान्यता है कि इन्हीं पवित्र स्थलों पर हर 12 वर्ष के अंतराल में महाकुंभ का आयोजन होता है, जहां करोड़ों श्रद्धालु अमृततुल्य स्नान का पुण्य प्राप्त करने पहुंचते हैं.