श्रेणी : videos | लेखक : The Hindu Today | दिनांक : 12 February 2026 12:54
सियाराम अयोध्या शोध संस्थान के पूर्व निर्देशक वाई.पी. सिंह बताते हैं कि एक मकान के निर्माण में महीनों और साल का समय लगता है, तो पूरे शहर के निर्माण में कितने साल लगे होंगे, इसका केवल अनुमान लगाया जा सकता है. डू राजस के इस लुप्त शहर में लोग बंदर की पूजा करते थे, जो निश्चित रूप से रामायण के हनुमान हैं. यह अहिरावण का राज्य क्षेत्र था, जहां राम और लक्ष्मण को ले जाया गया था और हनुमान जी ने उन्हें वापस लाया था. इस कारण वहां के लोगों ने हनुमान जी को महा शक्तिशाली मानते हुए अपनी पूजा का पात्र बनाया.
त्रेतायुग में भगवान श्रीराम जब अपने 11,000 वर्ष की लीला पूर्ण करके वैकुंठ जाने लगे, तो हनुमान जी भी उनके साथ जाना चाहते थे. हनुमान जी ने प्रभु से पूछा कि क्या वैकुंठ में उनकी कथा होती है. भगवान ने कहा कि वहां कथा नहीं होती. हनुमान जी ने उत्तर दिया कि उन्हें श्रीराम की कथा से बहुत प्रेम है और इसलिए वह पृथ्वी पर रहेंगे, जब तक कोई उनके बारे में कथा सुनाता रहेगा. इस कारण हनुमान जी अयोध्या में ही रुके और उन्हें भगवान ने हनुमानगढ़ी स्थान पर चौकीदारी का कार्य सौंपा.
विश्व के कई हिस्सों में भी राम और रामायण के प्रमाण मिलते हैं. पेरू में लोग आज भी सूर्य की पूजा करते हैं और उनके आदिवासी लोग अपने चेहरे को लाल रंग से रंगते हैं, जो हनुमान जी से निकट संबंध दर्शाता है. पेरू के लोग राजा को सूर्यवंशी मानते हैं और कौशल्या सुत राम का वंशज मानते हैं. माना जाता है कि सुग्रीव की सेना की खोज से समुद्र पार होकर राम और सीता के संबंध में यह क्षेत्र रामकथा से जुड़ा.
दक्षिण और उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, कंबोडिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और फिलीपींस में रामायण के प्रमाण पाए जाते हैं. जावा और बाली द्वीप में सीता की अग्नि परीक्षा और लंका यात्रा से संबंधित शिलालेख और शिला चित्र मौजूद हैं. जोगजकार्ता में रामायण बैले का आयोजन आज भी होता है. थाईलैंड के राजमहल और बैंकॉक में राम की उपाधि का उल्लेख मिलता है.
स्थानीय शिलालेख और चित्र बताते हैं कि रामायण का प्रभाव सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि मानव मूल्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है. इंडोनेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड और वियतनाम में रामायण के कथा स्थल आज भी जीवंत हैं. वहां के लोग राम और रामायण को जीवन में मानवता और नैतिक मूल्यों का आदर्श मानते हैं.
राम का जीवन चरित्र और उनकी लीला, चित्रों, शिलालेख और शास्त्रीय ग्रंथों में आज भी पूरी दुनिया में जीवित है. हर क्षेत्र में राम का प्रभाव उनके आदर्शों और मानव मूल्यों के कारण विद्यमान है. यही कारण है कि राम और रामायण केवल भारत में नहीं, बल्कि पूरे विश्व में सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक हैं.
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