ज्योतिष का सच: हॉरस्कोप या हॉरर स्कोप? जानिए ग्रहों की असली भूमिका

श्रेणी : videos | लेखक : The Hindu Today | दिनांक : 10 February 2026 01:41

आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में लोग हर कदम पर सफलता और सही समय की तलाश में रहते हैं. इसी खोज में ज्योतिष एक ऐसा सहारा बन गया है, जिस पर लाखों लोग भरोसा करते हैं. पर क्या आपने कभी सोचा है कि हॉरस्कोप यानी आपकी कुंडली, जिसे शुभ समय और मार्गदर्शन के लिए देखा जाता है, धीरे-धीरे 'हॉरर स्कोप' यानी डर और आशंका का कारण बन गया है? इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेस के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पंडित रमेश चिंतक कहते हैं कि आज के समय में ज्योतिष का गलत प्रचार लोगों में भय और भ्रम पैदा कर रहा है.

राहु, शनि और साढ़े साती जैसी अवधारणाओं का इस्तेमाल कई बार डराने के लिए किया जाता है, जबकि असल में ग्रह मित्र हैं, न कि शत्रु. पंडित रमेश बताते हैं कि सारे ग्रह देवता हैं और उनका उद्देश्य जीवन में न्याय और संतुलन बनाए रखना है. सच्चाई यह है कि यदि हम ग्रहों को समझदारी और मित्रवत दृष्टिकोण से देखें, तो वे हमारी जीवन रचना में मार्गदर्शक बन सकते हैं. शनि या अन्य ग्रह केवल कर्मों का फल देते हैं.

जैसे साढ़े साती आपके पिछले कर्मों का नतीजा होती है. इसलिए यह डर का विषय नहीं, बल्कि जीवन के नियम और प्राकृतिक न्याय का हिस्सा है. आज के युवा और आम लोग ज्योतिष को केवल भय के माध्यम के रूप में देखने लगे हैं. पंडित रमेश चेतावनी देते हैं कि इस गलत दृष्टिकोण ने हॉरस्कोप को 'हॉरर स्कोप' में बदल दिया है. यदि भाव, श्रद्धा और सही ज्ञान के साथ ग्रहों की जानकारी ली जाए.

तो ये हमारे जीवन में मार्गदर्शन और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बन सकते हैं. ज्योतिष का सही अध्ययन केवल भविष्य बताने का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे कर्म, निर्णय और मानसिक संतुलन को समझने का माध्यम है. पंडित रमेश का कहना है कि भाव और श्रद्धा के साथ ग्रहों की पूजा और उपाय करना ही असली ज्योतिषीय शक्ति है.