कितने दिन में तैयार हुआ रामसेतु, नाव पर क्यों नहीं गई राम की सेना?

श्रेणी : videos | लेखक : The Hindu Today | दिनांक : 12 February 2026 13:10

राम की वानर सेना की विशालता

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, राम की वानर सेना केवल बंदरों तक सीमित नहीं थी. इसमें रीछों की भी बड़ी संख्या शामिल थी. इतनी विशाल सेना को समुद्र पार कराने के लिए लाखों या करोड़ों नावों की जरूरत होती, जो उस समय उपलब्ध नहीं थीं.

नल और नील: पुल के शिल्पकार

राम ने अपनी सेना को लंका पहुँचाने के लिए नल और नील को पुल बनाने का आदेश दिया. ये दोनों विश्वकर्मा के पुत्र थे और उन्होंने पत्थरों और लकड़ियों के अद्भुत संयोजन से फ्लोटिंग ब्रिज तैयार किया.

वानर सेना के समूह और नेताओं का विवरण

वाल्मीकि रामायण में वानर सेना को कई टुकड़ों में बाँटा गया था, हर समूह का एक नेता था. प्रमुख सेनापति और उनके समूह इस प्रकार थे:

शताबली – कई हज़ार करोड़ वानर

तारा – कई हजार करोड़ वानर

गवाक्ष – हजार करोड़ वानर

धुम्रा – दो हजार करोड़ रीछ

नील – दस करोड़ वानर, पत्थर तैराने की क्षमता

जामवंत – दस करोड़ रीछ

गंधमादन – दस हजार करोड़ वानर

नाव की अनुपलब्धता और पुल की आवश्यकता

इतनी विशाल सेना को एक साथ नाव पर बिठाना असंभव था. राम सेतु ने केवल भौतिक मार्ग नहीं बनाया, बल्कि युद्ध और रणनीति की दृष्टि से भी यह सबसे उपयुक्त विकल्प था.

वाल्मीकि रामायण में संख्या और युद्ध विवरण

किष्किंधा कांड और युद्ध कांड में राम की वानर सेना के विवरण से पता चलता है कि उनकी संख्या लाखों, करोड़ों में थी. ये विवरण आधुनिक टीवी या फिल्मों में दिखाना असंभव है, लेकिन साहित्यिक स्रोत इसे स्पष्ट करते हैं.