श्रेणी : videos | लेखक : Rajesh Dwivedi | दिनांक : 09 December 2024 19:21
भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में Kumbh Mela का विशेष महत्व है. यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है, जहां करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुंभ मेला हर 12 साल में ही क्यों आयोजित होता है? इसके पीछे एक गहरा पौराणिक रहस्य छिपा हुआ है.
पौराणिक मान्यता के अनुसार देवताओं के 12 दिन, मनुष्यों के 12 वर्षों के बराबर माने जाते हैं. इसी कारण से कुंभ मेला भी हर 12 साल के अंतराल पर आयोजित किया जाता है. यह मेला भारत के चार पवित्र स्थानों- Prayagraj, Haridwar, Nashik और Ujjain में लगता है.
इंद्र और दुर्वासा की कथा से जुड़ा है कुंभ का रहस्य
कुंभ मेले की कथा का संबंध Indra और Durvasa से जुड़ी एक प्रसिद्ध घटना से माना जाता है.
एक बार जब इंद्र देव ने महर्षि दुर्वासा को प्रणाम किया, तो प्रसन्न होकर दुर्वासा ने उन्हें एक दिव्य माला भेंट की. लेकिन इंद्र ने उस माला का उचित सम्मान नहीं किया और उसे अपने हाथी Airavata के मस्तक पर रख दिया. ऐरावत ने माला को अपनी सूंड से नीचे गिराकर पैरों तले कुचल दिया.
यह देखकर महर्षि दुर्वासा क्रोधित हो गए और उन्होंने इंद्र को उनकी सारी शक्ति नष्ट होने का श्राप दे दिया.
समुद्र मंथन और अमृत की कहानी
शक्ति खोने के बाद इंद्र देव ने Brahma और Shiva से सहायता मांगी. दोनों देवताओं ने उन्हें Vishnu की आराधना करने की सलाह दी. भगवान विष्णु ने देवताओं को Samudra Manthan यानी क्षीरसागर के मंथन से अमृत निकालने का उपाय बताया.
इसके बाद देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया. जब अमृत कलश निकला तो उसे लेकर देवताओं और असुरों के बीच 12 दिन और 12 रातों तक भयंकर युद्ध हुआ.
चार स्थानों पर गिरा अमृत
युद्ध के दौरान अमृत कलश से अमृत की बूंदें चार स्थानों पर गिरीं-
Prayagraj
Haridwar
Nashik
Ujjain
इन्हीं पवित्र स्थानों पर आज कुंभ मेला आयोजित किया जाता है, जहां करोड़ों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त करते हैं.
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