श्रेणी: Rigveda | लेखक : Sagar Dwivedi | दिनांक : 24 March 2026 12:39
प्रिंटिंग प्रेस, इंटरनेट या यहाँ तक कि लिखित भाषा के आविष्कार से बहुत पहले, मनुष्य तारों की ओर देखकर अस्तित्व के सबसे गहरे सवाल पूछ रहा था. हम कौन हैं? यह ब्रह्मांड कहाँ से आया? हम उस अनंत से कैसे जुड़ सकते हैं? इन सवालों के जवाब- जिन्हें प्राचीन ऋषियों ने गाया और जो पीढ़ियों तक केवल स्मृति के सहारे सौंपे गए. ऋग्वेद का निर्माण करते हैं.
ऋग्वेद केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है; यह मानवीय चेतना और भावना का एक भव्य स्मारक है. 'ऋक्' का अर्थ है "स्तुति" या "छंद" और 'वेद' का अर्थ है "ज्ञान". 1,028 सूक्तों (भजनों) का यह विशाल संग्रह प्रकृति की शक्तियों- अग्नि, वायु, उषा और ब्रह्मांड-nको समर्पित है. लेकिन इन स्तुतियों के ठीक नीचे सत्य और ब्रह्मांडीय व्यवस्था (ऋत) की एक गहरी दार्शनिक खोज छिपी है.
आज की तेज-तर्रार दुनिया में, ऋग्वेद हमें याद दिलाता है कि हजारों साल पहले भी इंसान उसी आश्चर्य के साथ सूर्योदय को देखता था, जैसे हम आज देखते हैं. यह अतीत की कोई किताब नहीं, बल्कि प्रकाश की खोज जारी रखने का एक शाश्वत निमंत्रण है.
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