श्रेणी : अन्य | लेखक : tht | दिनांक : 18 April 2026 01:33
रामायण और महाभारत सहित कई प्राचीन ग्रंथों में 'स्वयंवर' की परंपरा का उल्लेख मिलता है. इसी परंपरा के तहत माता सीता के विवाह को लेकर भी एक महत्वपूर्ण प्रसंग मिलता है, जिसे 'धनुष यज्ञ' और 'सीता स्वयंवर' के रूप में जाना जाता है.
वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में इसका विस्तार से वर्णन मिलता है, जिसमें मिथिला के राजा जनक द्वारा एक कठिन शर्त रखकर स्वयंवर आयोजित किया गया था.
क्या सच में सीता का स्वयंवर हुआ था?
सवाल- क्या वाल्मीकि रामायण में सीता स्वयंवर का उल्लेख है?
जवाब- वाल्मीकि रामायण के अनुसार राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के लिए एक स्वयंवर का आयोजन किया था, जिसे कई विद्वान 'धनुष यज्ञ' भी कहते हैं. इस आयोजन में शर्त रखी गई थी कि जो भी भगवान शिव के अत्यंत भारी धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह करेगा.
धनुष यज्ञ और स्वयंवर का वर्णन
सवाल- इस स्वयंवर की शर्त क्या थी?
जवाब- ग्रंथों के अनुसार राजा जनक को वरुण देव से एक दिव्य धनुष प्राप्त हुआ था. यह धनुष इतना भारी था कि कोई भी राजा या योद्धा उसे हिला भी नहीं पाता था. जनक ने सभा में घोषणा की. जो इस धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही मेरी पुत्री सीता से विवाह करेगा."
सवाल- श्रीराम का स्वयंवर में क्या योगदान था?
जवाब- बहुत समय बाद ऋषि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण मिथिला पहुंचे. वहां धनुष यज्ञ का आयोजन देखा गया. विश्वामित्र के आदेश पर श्रीराम को धनुष दिखाया गया. श्रीराम ने अत्यंत सहजता से धनुष उठाया, उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई और जैसे ही उन्होंने उसे खींचा, धनुष बीच से टूट गया. इस घटना का वर्णन इस प्रकार मिलता है- 'जब श्रीराम धनुष को पूरी शक्ति से खींच रहे थे, तभी वह धनुष बीच से दो हिस्सों में टूट गया.
क्या सीता ने स्वयंवर में चयन किया था?
सवाल- क्या यह पारंपरिक स्वयंवर जैसा था?
जवाब- सीता स्वयंवर को पारंपरिक अर्थ में 'स्वयं चयन' (स्वयंवर) माना गया है, लेकिन इसमें मुख्य भूमिका धनुष यज्ञ की शर्त ने निभाई. इसी कारण इसे कभी-कभी 'पूर्व-शर्त आधारित स्वयंवर” भी कहा जाता है, जहां चयन योग्यता आधारित था.
द्रौपदी और अन्य स्वयंवरों से तुलना
महाभारत में द्रौपदी स्वयंवर, दमयंती स्वयंवर और अन्य कई उदाहरण मिलते हैं, जहां स्वयंवर की अवधारणा अलग-अलग रूपों में दिखाई देती है. इसी तरह सीता स्वयंवर को भी एक विशेष प्रकार का धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है.
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