घर के लिए आंगन कितना जरूरी?

Category : shorts | Author : The Hindu Today | Date : 20 February 2026 12:13

आज के आधुनिक दौर में हर व्यक्ति अपने करियर के साथ-साथ एक सुंदर और सुरक्षित घर का सपना भी संजोकर रखता है. यही वजह है कि अब अधिकांश लोग घर निर्माण के समय वास्तु शास्त्र का विशेष ध्यान रखते हैं. हालांकि, वास्तु की मूल भावना और उसके वैज्ञानिक आधार को हर कोई गहराई से नहीं समझ पाता.


‘द हिन्दू टूडे, लंदन’ अपनी विशेष प्रस्तुति में आपको वास्तु शास्त्र की मूल अवधारणा से सरल और संक्षिप्त रूप में परिचित करा रहा है. इस श्रृंखला में तथ्यात्मक जानकारी के साथ कानपुर के वास्तु विशेषज्ञ विमल झाझरिया से भी आपकी मुलाकात कराई जाएगी, जिनके सुझाव घर निर्माण में उपयोगी साबित हो सकते हैं. आइए, वास्तु के इस डिजिटल संवाद में आप भी हमारे सहभागी बनें.


सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि वास्तु शास्त्र भारतीय ऋषि-मुनियों की अमूल्य देन है. ऋग्वेद में घर के संरक्षक को ‘वास्तुपति’ कहा गया है. भगवान विश्वकर्मा को इस शास्त्र का जनक माना जाता है. भारतीय दर्शन, गणित, भूगोल, भूविज्ञान और आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित यह विद्या सदियों से जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने का मार्ग दिखाती रही है.